अब ट्रेनों से इमरजेंसी चेन हटाने पर चल रहा मंथन, ऐसा हो सकता है विकल्प…

अब ट्रेनों से इमरजेंसी चेन हटाने पर चल रहा मंथन, ऐसा हो सकता है विकल्प

खास बातें
चेन पुलिंग होने पर 15 से 20 मिनट ट्रेन लेट होती है
इन रूटों पर चेन पुलिंग अधिक
इन ट्रेनों का बुरा हाल

चेन पुलिंग के लगातार बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने में रेलवे नाकाम साबित हो रही है। पिछले डेढ़ साल में उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे में चेन पुलिंग के 2680 मामले दर्ज हुए हैं और यह लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इससे निपटने के लिए कोई सही रास्ता निकालने की बजाय रेलवे प्रशासन अब इमरजेंसी चेन ही हटाकर दूसरे विकल्प पर मंथन कर रही है, जिसका दुरुपयोग नहीं किया जा सके।

रेलवे में मैकेनिकल विभाग के अधिकारी बताते हैं कि एक बार ट्रेन में चेन पुलिंग होने पर 15 से 20 मिनट ट्रेन लेट होती है। दोबारा एयरप्रेशर बनने के बाद ही ट्रेन रवाना की जाती है। एक बार चेन पुलिंग की गई तो एयरप्रेशर बनाने में 20-25 लीटर डीजल की खपत होती है। रेलवे को सालाना हजारों लीटर डीजल का नुकसान उठाना पड़ता है। इतना ही नहीं रूट पर पीछे से आने वाली गाड़ियां भी पिट जाती हैं। इससे यात्रियों को दिक्कतें होती हैं।

ये हो सकता है इमरजेंसी चेन का विकल्प

बोर्ड अधिकारियों की मानें तो इमरजेंसी चेन हटाने से रेलवे को राजस्व का नुकसान नहीं होगा। दूसरे, ट्रेनों की पंक्चुएलिटी में भी सुधार होगा। इमरजेंसी चेन हटाने के बाद पैसेंजरों को यह सुविधा दी जाएगी कि सीधे गार्ड या लोको पायलट को आपात स्थिति की सूचना दें, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रेन को रोकने या नहीं रोकने का निर्णय लिया जाएगा। साथ ही मदद के लिए तत्काल एस्कॉर्ट को सूचित कर दिया जाएगा। इसके लिए मोबाइल एप्लीकेशन भी बनाया जा सकता है। इन उपायों पर रेलवे मंथन कर रहा है।

इन रूटों पर चेन पुलिंग सबसे अधिक

चेन पुलिंग के सर्वाधिक मामले अकबरपुर-मालीपुर, प्रयाग-फूलपुर, गौरीगंज-अमेठी, जंघई-भदोही ट्रैक पर होते हैं। सर्वाधिक प्रभावित स्टेशनों में बादशाहपुर, चिलबिला, शाहगंज, बिलवई, भदोही, फाफामऊ, शाहगंज, गौरीगंज, सुरयावां, रायबरेली, रामचौरा शामिल हैं। ऐसे ही पूर्वोत्तर रेलवे में चेन पुलिंग बाराबंकी-गोंडा, बहराइच और उसके आगे के सेक्शन प्रभावित होते हैं।

इन ट्रेनों का बुरा हाल

लखनऊ-वाराणसी मेल (14220), गंगा-सतलज (13307), दून एक्सप्रेस (13009), कैफियत (12225), कामायनी (11071), पद्मावत (14207), भोपाल-लखनऊ (12183), छपरा-लोकमान्य तिलक (11060), सारनाथ एक्सप्रेस (15159), चौरी-चौरा (15003), त्रिवेणी (14369), मरुधर (14853), गोरखधाम (12555)।

चेन पुलिंग के मामले
2018 से 2019 जुलाई तक

उत्तर रेलवे पूर्वोत्तर रेलवे उत्तर रेलवे पूर्वोत्तर रेलवे

मामले पंजीकृत 590 1093 567 430
गिरफ्तारियां 580 936 534 377
जेल भेजे गए 12 41 12 14
जुर्माना (रुपये में) 2,81,315 3,43,645 2,72,945 2,30,205

चेन पुलिंग रोकने में रेलवे नाकाम

पिछले डेढ़ साल में उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे में चेन पुलिंग के 2680 मामले दर्ज हुए हैं। आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं। चेन पुलिंग रोकने में नाकाम रेलवे अब इमरजेंसी चेन ही हटाने पर मंथन कर रहा है।

उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में वर्ष 2018 में जहां 590 चेन पुलिंग के लिए मामले दर्ज हुए थे। वहीं इसी साल पूर्वोत्तर रेलवे में 1093 बार बेवजह चेन खींची गई। इसके अलावा 2019 में जुलाई तक उत्तर रेलवे में 567 बार और पूर्वोत्तर रेलवे में 430 बार चेन पुलिंग हुई है।

इसलिए लगाई गई इमरजेंसी चेन : ट्रेनों में आग लगने, छेड़छाड़, लूट की स्थिति में ट्रेन को तुरंत रोकने के लिए इमरजेंसी चेन लगाई गई है। एक ट्रेन में करीब 200 इमरजेंसी चेन होती है।

चेन पुलिंग यात्रियों की सुविधा के लिए है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल अधिक हो रहा है। पैसेंजर मामूली राहत के लिए जगह-जगह चेन खींचकर ट्रेन रोक देते हैं। ऐसे लोगों से आरपीएफ सख्ती से निपट रही है- दीपक कुमार, सीपीआरओ, उत्तर रेलवे

सौजन्य: अ. उजाला