A patient brings fruit to other patients | वार्ड से लापता हो जाता था बुजुर्ग, डॉक्टरों ने डांटा तो मरीज बोले- हमारे लिए फल लेने जाता है

वार्ड से लापता हो जाता था बुजुर्ग, डॉक्टरों ने डांटा तो मरीज बोले- हमारे लिए फल लेने जाता है

    • 60 साल के बुजुर्ग राजू पांडे ने बताया- मुझसे भूखे मरीज देखे नहीं जाते थे, इसलिए मदद करने लगा

    • अस्पताल प्रबंधन पहले तो नाराज हुआ, लेकिन बाद में उसने राजू की तारीफ की

सूरत (गुजरात). स्मीमेर अस्पताल में एक मरीज अक्सर वार्ड से गायब हो जाता था। इस बात को लेकर डॉक्टर जब उसे डांटने लगे तो अन्य मरीज उनके समर्थन में आ गए। मरीजों ने कहा कि इन्हें कुछ मत कहिए। ये रोज बाहर जाते हैं, तो झोले में फल लेकर आते हैं। हम सबको देते हैं। इस पर डॉक्टर्स ने पांडेसरा के रहने वाले 60 साल के मरीज राजू पांडे की तारीफ की।

राजू पेशे से सिक्युरिटी गार्ड हैं। डेढ़ महीने पहले एक्सीडेंट में उनका एक हाथ फैक्चर हो गया था। वे इलाज के लिए स्मीमेर अस्पताल में भर्ती हुए थे। उन्होंने बताया कि मैंने तो लोगों की मदद करने की कोशिश की। मैंने देखा कि कई मरीजों को ठीक से खाना भी नहीं मिलता है। कुछ ऐसे भी मरीज थे, जो दवाई भी नहीं खरीद सकते थे। बस मैंने अपनी तरफ से एक कोशिश की है।

अस्पताल के स्टाफ ने शिकायत की

    • राजू ने बताया, “मेरे मन में ऐसे मरीजों की मदद करने का विचार आया। उसके बाद जब भी मुझे मौका मिलता मैं दिन में एक बार वार्ड से निकल जाता था। कुछ घंटे बाद वापस आकर मरीजों को फल देता था। 20-25 दिन तो किसी को पता नहीं चला। बाद में अस्पताल के स्टाफ ने मेरी शिकायत डॉक्टरों से कर दी। डॉक्टर्स ने मुझे वॉर्निंग देनी शुरू कर दी।”

    • “मेरा झोला चेक किया गया तो उसमें से फल निकले। कई मरीजों ने मेरा साथ दिया।”

मैं सोचता था, मैं अकेला हूं

राजू ने बताया कि मेरा एक्सीडेंट हुआ तो कोई मेरे साथ नहीं था। अकेले रहने का दर्द मुझे पता है। अस्पताल में भर्ती हुआ तो पता चला कि यहां मुझसे भी ज्यादा परेशान लोग हैं। हड्डी के मरीजों को डॉक्टर फल, दूध और अच्छा खाना खाने के  लिए कहते हैं, लेकिन वे सक्षम नहीं हैं। मैंने सोचा कि क्यों न इनके लिए बाहर से फल लाया जाए। वार्ड बाहर जाने की इजाजत नहीं थी, इसलिए मौका पाकर चुपके से जाता था।

समाजसेवी ने कहा- राजू की प्रशंसा होनी चाहिए

समाजसेवी सुभाष रावल ने बताया कि डॉक्टर अक्सर राजू पांडे की शिकायत करते थे। कहते थे कि कैसा मरीज आ गया है, जो हर दिन वार्ड से गायब हो जाता है। इसका कुछ करिए या फिर इसे यहां से ले जाइए। एक दिन मैं डॉक्टरों के साथ गया और पकड़ लिया। झोला चेक किया तो उसमें से फल निकले। मरीज भी उनके समर्थन में आ गए। यह जानकर हम सब भावुक हो गए। उनकी इस सेवा भाव से हम सब प्रभावित हुए और उनकी प्रशंसा की

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